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ग्रामीण क्षेत्र व शहरी क्षेत्र के माध्यमिक स्तर के बालकों व बालिकाओं में निर्णय क्षमता का अध्ययन करना

शिक्षा मनुष्य के सामान्य व्यवहार के साथ-साथ विशिष्ट व्यवहार को भी सर्वोत्तम ढ़ंग से सम्पादित करती है। शिक्षा के अभाव में मनुष्य नाम मात्र का रह जाता है। मनुष्य की…

विकास की अवधारणा : हिन्द स्वराज और उत्तर गांधी परिदृश्य

विकास शब्द का प्रयोग व्यापक अर्थ में किया जाता है। सामान्यतः किसी भी स्थिति में बदलाव विकास कहलाता है। यह परिवर्तन की उस गति को दर्शाता है जिसके अन्तर्गत एक…

ग्रामीण और शहरी परिवेश के बालकों में नैतिक मूल्यों के विकास का अध्ययन (मध्य प्रदेश के नीमच जिले के विशेष सन्दर्भ में)

प्रस्तुत शोध कार्य में बालकों के संबध में नैतिक मूल्य के प्रभाव को बालक-अभिभावक सबंध से प्रभावित होने वाले कारकों के रूप में चुना गया है। वर्तमान समय मे भारतीय…

भारतीय सभ्य (नागरिक) समाज : एक कटु यथार्थ

सभ्य (नागरिक) समाज (सिविल सोसायटी) की अवधारणा विविध आयामी यथा-राजनीतिक, प्रषासनिक, सामाजिक, नैतिक एवं आर्थिक इत्यादि संदर्भों में प्रयुक्त की जाती है। तृतीयक क्षेत्रक के रूप में अभिहित सभ्य समाज…

राजस्थान राज्य के दौसा शहर में संचालित मदरसों एवं सामान्य विद्यालयों में अध्ययनरत बालक- बालिकाओं के जीवन मूल्यों एवं समायोजन का अध्ययन

भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है इसमे विभिन्न धर्मां के लोग एक साथ निवास करते है। मिल-जुल कर रहते हैं। एक दूसरे की सभ्यता-संस्कृति एवं संस्कारो का सम्मान करते हैं।…

इतिहास लेखन का बदलता स्वरूप और साहित्य के साथ अन्तर्सम्बन्ध : एक सर्वेक्षण

कहा जाता है कि साहित्य का संबंध कल्पनाओं से होता है जबकि इतिहास का संबंध वास्तविकताओं से। इसके बावजूद इन दोनों विधाओं के बीच आपसी लेन-देन एवं अन्तरमिलन के भी…

महर्षि अरविन्द घोष के शैक्षिक विचारों की आधुनिक सन्दर्भ में प्रासांगिकता

श्री अरविन्द एक राष्ट्रवादी विचारक थे। वह स्वयं एक देश भक्त थे। इसके साथ श्री अरविन्द भौतिकवादी जीवन पद्धति के साथ शिक्षा के तादाम्य के बीच मानव जीवन के अंतर्मन…

मानव अधिकार और भारतीय संस्कृति एवं साहित्य

मानवाधिकारों की संकल्पना एक व्यापक जीवन-दर्षन पर आधारित संकल्पना है जिसके घेरे में समूचा जीवन और समाज व्यवस्था आ जाती है। मानवाधिकारों की संकल्पना की बूनियाद है मनुश्य को सब…

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