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विकसित भारत @2047 के लिए समग्र शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों एवं संवैधानिक आदर्शों का समन्वय

विकसित भारत @2047 की परिकल्पना भारत को केवल आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जो मानवीय…

विवेकानंद के शैक्षिक चिंतन की प्रासंगिकता

स्वामी विवेकानंद जी के शिक्षा सम्बन्धी विचार जितने प्रासंगिक आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व थे, उससे कहीं अधिक प्रासंगिक आज के सन्दर्भ में है । स्वामी जी ने पुरजोर तरीके…

शिक्षा, राजनीति और आलोचना का संकट: कार्टून विवाद के बहाने आलोचनात्मक चिन्तन पर अंकुश

यह शोध आलेख 2012 में घटित एनसीईआरटी कार्टून विवाद को आधार बनाकर भारतीय शैक्षणिक प्रणाली, आलोचनात्मक चिंतन, और विचारधारात्मक असहिष्णुता के संकट की गहराई से पड़ताल करता है। आलेख का…

पर्यावरण की आर्थिक धारणाओं के प्रति उत्पादकों की जागरूकता : वर्तमान की महती आवश्यकता

वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वैश्विक विमर्श के केन्द्रीय मुद्दे बन चुके हैं। उत्पादन तंत्र पर बढते औद्योगिकरण, कृषि विस्तार, खनन, ऊर्जा उपभोग और कार्बन उत्सर्जन ने…

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