Category: Archive

आदमीयत की सही मंजिल का संधान करती कहानियाँ

दलित साहित्य, हिन्दी में विचार की जमीन पर जितना प्रखर और मुखर है, रचनात्मक धरातल पर उसकी उपलब्धियाँ अभी उतनी उल्लेखनीय नहीं हैं, जैसी कि वे मराठी में हैं। बावजूद…

पंचायती राज में महिला सरपंचों की सहभागिता

भारतवर्ष में प्राचीन काल से गणतन्त्र विद्यमान थे।1 ब्रिटिश शासनकाल में पंचायतें तथा स्थानीय संस्थाएँ धीरे-धीरे शक्तिहीन होती चली गईं। स्वतन्त्रता के पश्चात् संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में स्थानीय…

हमारी राष्ट्रीय अस्मिता और भविष्य का नारी साहित्य

वैदिक काल से आज तक साहित्य की सभी विद्याओं में महिलाओं ने पुरूषों के समान अपनी सर्जनात्मक शक्ति का परिचय दिया है। विश्व इतिहास साक्षी है कि इस पुरूष समाज…

लैंगिक समानता: मिथक या यथार्थ

सारांश: प्रसिद्ध नारीवादी सिमोन द बुआ लिखती है कि पुरुष को मनुष्य के रूप में और स्त्री को स्त्री के रूप में परिभाषित किया जाता है। जब भी स्त्री मनुष्य…

बुनियादी सुविधाओं से बदलेगी भारत की तस्वीर

भारत की अधिकतर आबादी गांव में बसती है इसलिए भारत के विकास की संकल्पना को पूरा करने तथा विकसित राष्ट्र बनाने के लिए देश में बुनियादी सुविधाएं लोगों को प्रदान…

आजादी का अमृतकाल और नई शिक्षा नीति के बदलते परिदृश्य में निहितार्थ

भारत ने स्वतंत्रता के बाद से अमृतकाल तक एक अद्वितीय यात्रा तय की है। शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण परिवर्तन और विकास हुआ है। इस लेख…

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