भारत में बच्चों द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग: नियामक चुनौतियाँ और लोक नीतिगत विकल्प

Dr. Mohan Mishra
डॉ मोहन मिश्रा सहायक आचार्य, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय, अजमेर , ई - मेल : mishramohan909@gmail.com
सारांश बच्चों में सोशल मीडिया का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है और इसने बच्चों के सीखने, संवाद करने और आपस में जुड़ने के तरीके को बदल दिया है। सोशल मीडिया मंच बच्चों को शिक्षा, रचनात्मकता और सामाजिक भागीदारी के अवसर देते हैं, परन्तु साथ ही उन्हें साइबर-उत्पीड़न, ऑनलाइन ग्रूमिंग, हानिकारक सामग्री, निजता के उल्लंघन, डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों जैसे जोखिमों में भी डालते हैं। यह अध्ययन भारत में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग से जुड़े संवैधानिक और कानूनी ढाँचे का आलोचनात्मक विश्लेषण करता है। इसमें सैद्धांतिक विधिक शोध-पद्धति अपनाई गई है, जिसमें संविधान, विधानों, नियमों और न्यायिक निर्णयों को प्राथमिक स्रोत तथा नीतिगत रिपोर्टों, शोध-पत्रों और विद्वतापूर्ण साहित्य को द्वितीयक स्रोत के रूप में प्रयोग किया गया है। अध्ययन में नौ देशों, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी, के नियामक मॉडलों का तुलनात्मक विश्लेषण भी किया गया है, ताकि भारत के लिए उपयोगी सर्वोत्तम कार्यप्रणाली की पहचान की जा सके। अध्ययन से पता चलता है कि साइबर सुरक्षा, बाल संरक्षण और डेटा निजता से जुड़े कई कानून होने के बावजूद, भारत में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को समग्र रूप से विनियमित करने वाला कोई एक व्यापक कानून नहीं है। मौजूदा ढाँचा आयु-सत्यापन, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, एल्गोरिदमिक की पारदर्शिता और बच्चों के डिजिटल कल्याण जैसे मुद्दों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता। अतः यह शोध-पत्र बच्चों के अधिकारों और उनकी ऑनलाइन सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने वाले बाल-केंद्रित एवं अधिकार-आधारित कानूनी ढाँचे की आवश्यकता पर बल देता है, जिसके लिए सरकार, तकनीकी कंपनियों, विद्यालयों, अभिभावकों और नागरिक समाज के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। मुख्य शब्द: सोशल मीडिया, बाल अधिकार, डिजिटल अभिशासन, साइबर विधि, लोक नीति, ऑनलाइन सुरक्षा, डेटा संरक्षण, प्लेटफॉर्म उत्तरदायित्व, डिजिटल कल्याण।

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