अंतर्विषयक अन्वेषण में हिंदी विषय में सुधार
अतं र्वि षर्वि यक अन्वेषण के अतं र्गतर्ग हि दं ी वि षय मेंसध ु ार श्रीमती शालि नी भारद्वाज सहायक प्रोफेसर, हि दं ी वि भाग shalinibhardwajynr@gmail.com Mob. 9416794708…
अतं र्वि षर्वि यक अन्वेषण के अतं र्गतर्ग हि दं ी वि षय मेंसध ु ार श्रीमती शालि नी भारद्वाज सहायक प्रोफेसर, हि दं ी वि भाग shalinibhardwajynr@gmail.com Mob. 9416794708…
ABSTRACT The elderly population in India is increasing rapidly, and it is bringing several issues related to their rights, care, welfare, and protection. This paper studies the legal framework which…
The overall analysis demonstrates a clear and consistent association between socioeconomic status and sports participation across both rural and urban environments. Participation rates increase proportionally with improvements in SES, indicating…
सारांश यह शोध पत्र समकालीन भारतीय सामाजिक आंदोलनों में युवाओं की भागीदारी की प्रकृति, रूपरेखा और प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। युवा वर्ग समाज में परिवर्तन के सबसे सक्रिय…
प्रस्तुत शोध-पत्र “जैविक उत्पत्ति, जिजीविषा, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में बेटियाँः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” बालिकाओं की स्थिति को जैविक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक आयामों के अंतर्संबंध में समझने का प्रयास…
सारांश भारत और चीन एशिया की दो प्राचीन सभ्यताएँ तथा आधुनिक विश्व की उभरती महाशक्तियाँ हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक संपर्क, आर्थिक सहयोग और राजनीतिक संवाद के बावजूद…
Entrepreneurial leadership in India has developed through a distinctive interaction of cultural traditions, philosophical thought, and contemporary economic realities. Indian entrepreneurs function not only as agents of economic transformation but…
प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों में समायोजन और उपलब्धि अभिप्रेरणा के स्तर का आकलन करना है। समायोजन को गृह, विद्यालय, सामाजिक और भावनात्मक आयामों में…
भारतीय ज्ञान परम्परा का मूल आधार वेद माने जाते हैं, जिन्हें अपौरुषेय तथा सनातन ज्ञान का स्रोत कहा गया है। वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, अपितु उनमें दर्शन, विज्ञान,…
सारांश इक्कीसवीं सदी की शिक्षण-व्यवस्था में शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान-प्रदाय तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह प्रशासक, परामर्शदाता, अनुशासनकर्ता, तकनीकी अनुकूलक एवं सामाजिक मार्गदर्शक के रूप में…