डिजिटल शासन एवं सामाजिक सुधार : भारत में समावेशी, सुरक्षित एवं नागरिक-केंद्रित शासन की दिशाएँ

Sahdev Singh
आचार्य, राजनीति विज्ञान, राजकीय कन्या महाविद्यालय, किशनपोल, जयपुर

Co-Author 1

डॉ.सहदेव सिंह चौधरी
सहा. आचार्य, राजनीति विज्ञान, राजकीय कन्या महाविद्यालय, किशनपोल, जयपुर
शोध सारांश इक्कीसवीं सदी में डिजिटल प्रौद्योगिकी शासन, राज्य–नागरिक संबंध और सामाजिक परिवर्तन को पुनर्परिभाषित कर रही है। भारत में डिजिटल शासन इलेक्ट्रॉनिक शासन से आगे बढ़कर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर—डीपीआई) के व्यापक तंत्र में विकसित हुआ है। आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, यूपीआई, डिजिलॉकर, उमंग, सामान्य सेवा केंद्र, ई-श्रम, ई-संजीवनी, पोषण ट्रैकर, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य ने सेवा-प्रदाय, पारदर्शिता और निगरानी को नई दिशा दी है। यह शोध-पत्र डिजिटल शासन और सामाजिक सुधार के अंतर्संबंध का विश्लेषण करता है, विशेषतः महिला सुरक्षा, मातृत्व, बाल संरक्षण, असंगठित श्रमिकों और वंचित वर्गों के संदर्भ में। साथ ही डिजिटल विभाजन, निजता, साइबर सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पक्षपात तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न शक्ति-केंद्रीकरण जैसी चुनौतियों का विवेचन किया गया है। 2026 में सैम ऑल्टमैन द्वारा मानव नियंत्रण के क्षरण और अत्यधिक शक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण शक्ति-केंद्रीकरण संबंधी चेतावनियाँ इस विमर्श को समकालीन संदर्भ प्रदान करती हैं।[ अध्ययन का निष्कर्ष है कि डिजिटल शासन तभी सामाजिक सुधार का प्रभावी माध्यम बन सकता है जब तकनीकी दक्षता के साथ सामाजिक न्याय, मानव गरिमा, निजता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और मानवीय नियंत्रण को समान महत्व दिया जाए।

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