अध्यापक शिक्षकों की शिक्षण दक्षता का छात्राध्यापकों की शैक्षिक अभिवृत्ति पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन
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Published on: Jul 14, 2026
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Co-Authors: डॉ. हरलाल बाजिया
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DOI: CIJE20261121409_10
Ved prakash Nagar
शोधार्थी, गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा (राजस्थान) Email : 7487vednagar@gmail.com, Mobile- 907930098
Co-Author 1
डॉ. हरलाल बाजिया
शोध निर्देशक, गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा (राजस्थान)
शिक्षक तैयार करने वाले कार्यक्रमों की कामयाबी इस बात पर टिकी है कि खुद ट्रेनर यानी अध्यापक शिक्षक कक्षा कक्ष में कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बात को केंद्र में रखकर यह शोध कार्य किया गया है। इसका मुख्य मकसद यह पता लगाना था कि अध्यापक शिक्षकों की अपनी शिक्षण दक्षता का उनके छात्राध्यापकों की शैक्षिक अभिवृत्ति पर क्या असर पड़ता है। साथ ही, यह भी देखा गया कि क्या शहरी या ग्रामीण परिवेश से जुड़े होने के कारण इस प्रभाव में कोई अंतर आता है या नहीं। इस शोध को पूरा करने के लिए वर्णनात्मक सर्वेक्षण विधि को काम लिया गया। इसके तहत कोटा विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों के 20 अलग-अलग बी.एड. कॉलेजों को चुना गया, जहाँ से 100 अध्यापक शिक्षकों और 400 छात्राध्यापकों को एक न्यादर्श के रूप में चुना है। आँकड़े इकट्ठा करने के लिए मानकीकृत उपकरणों को उपयोग में लिया गया। । इन आँकड़ों की बारीकी से जाँच करने के लिए मध्यमान, प्रामाणिक विचलन, सहसंबंध और टी-परीक्षण जैसी सांख्यिकीय विधियों को अपनाया गया। जब 0.05 सार्थकता स्तर पर समंको की गणना की गई, तो शिक्षण दक्षता के लिए टी-मूल्य 1.77 और शैक्षिक अभिवृत्ति के लिए 1.81 निकलकर आया। चूँकि ये दोनों ही मान तय मानक मूल्य से कम हैं, इसलिए यह साफ़ हो गया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच कोई वास्तविक या सार्थक अंतर मौजूद नहीं है। इसी आधार पर शोध में तय की गई शून्य परिकल्पनाओं को स्वीकार कर लिया गया। सरल शब्दों में कहें तो निष्कर्ष यही निकलता है कि भौगोलिक क्षेत्र या परिवेश बदलने से न तो शिक्षकों की दक्षता पर कोई बड़ा फर्क पड़ता है और न ही छात्रों की अभिवृत्ति पर। यह अध्ययन ज़ोर देकर सुझाव देता है कि आज के बदलते दौर में हमें ग्रामीण-शहरी के फेर में पड़ने के बजाय, सभी अध्यापक शिक्षकों की कार्यकुशलता को निखारने के लिए समय-समय पर 'दक्षता संवर्धन कार्यक्रम' चलाने चाहिए। जब ट्रेनर बेहतर होंगे, तभी भावी शिक्षकों का दृष्टिकोण भी मजबूत और सकारात्मक बन सकेगा। मुख्य शब्द अध्यापक शिक्षक, शिक्षण दक्षता, शैक्षिक अभिवृत्ति, छात्राध्यापक, टी-परीक्षण, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र।