शिक्षकों पर व्यावसायिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके बहुआयामी प्रभावों का एक समग्र अध्ययन

URMILA YADAV
उर्मिला यादव शोधार्थी, महर्षि अरविंद विश्वविद्यालय, जयपुर

Co-Author 1

प्रोफेसर (डॉ) चंदन सहारण
शोध निर्देशक/विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, महर्षि अरविंद विश्वविद्यालय, जयपुर
सारांश इक्कीसवीं सदी की शिक्षण-व्यवस्था में शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान-प्रदाय तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह प्रशासक, परामर्शदाता, अनुशासनकर्ता, तकनीकी अनुकूलक एवं सामाजिक मार्गदर्शक के रूप में भी कार्य कर रहा है। इस विस्तारित भूमिका ने शिक्षकों पर अभूतपूर्व मानसिक एवं व्यावसायिक दबाव उत्पन्न किया है। प्रस्तुत शोध-पत्र माध्यमिक आँकड़ों (Secondary Data) के आधार पर यह विश्लेषण करता है कि किस प्रकार कार्य-स्थल पर उत्पन्न दबाव (Occupational Pressure) शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य विशेषतः तनाव, अवसाद, चिंता एवं बर्नआउट को प्रभावित कर रहा है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ भारत, विशेषकर राजस्थान के सन्दर्भ में केस-स्टडी, न्यायिक हस्तक्षेप, एवं नीतिगत प्रयासों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि शिक्षक-मानसिक-स्वास्थ्य की उपेक्षा न केवल शिक्षक-पलायन (Teacher Attrition) को बढ़ाती है, बल्कि विद्यार्थियों की शैक्षिक, सामाजिक एवं भावनात्मक उपलब्धियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। मुख्य शब्द (Keywords):शिक्षक मानसिक स्वास्थ्य, व्यावसायिक दबाव, बर्नआउट, जॉब डिमांड-रिसोर्स मॉडल, मानसिक-स्वास्थ्य, शैक्षिक सुधार।

Highlights