महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा चुनौतियां, प्रभाव और समाधान की एक व्यापक समीक्षा

Pinki Dhankhar
शोधार्थी, श्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला विश्वविद्यालय, चुडेला, झुंझुनू (राज.)

Co-Author 1

डॉ. विजयमाला
सहायक प्रोफ़ेसर, श्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टिबड़ेवाला विश्वविद्यालय, चुडेला, झुंझुनू (राज.)

Co-Author 2

डॉ.सैय्यद कलीम अख्तर
सहायक प्रोफ़ेसर, नारायण स्कूल ऑफ लॉ गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय जमुहार सासाराम बिहार
शोध-साराांश महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा एक जटिल और वैश्विक समस्या है, जो महिलाओं के शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है। यह केवल व्यक्तिगत संकट का कारण नहीं बनता, बल्कि समाज और राष्ट्र की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डालता है। घरेलू हिंसा के विभिन्न रूप होते हैं, जैसे शारीरिक, मानसिक, यौन और आर्थिक हिंसा, जो समाज में महिलाओं के उत्पीड़न का परिणाम होते हैं। इस शोध का उद्देश्य महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा के कारणों, प्रभावों, और इसके समाधान पर व्यापक समीक्षा प्रदान करना है। घरेलू हिंसा की उत्पत्ति में पारिवारिक असमानताएँ, शिक्षा की कमी, सामाजिक दबाव, और पुरानी परंपराएं शामिल हैं। इस शोध में घरेलू हिंसा के परिणामस्वरूप होने वाले मानसिक और शारीरिक नुकसान, महिलाओं के आत्मसम्मान पर पड़ने वाले प्रभाव, और उनके सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही, घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाने के लिए लागू किए गए कानूनी और सामाजिक उपायों का मूल्यांकन किया जाएगा। इस शोध में घरेलू हिंसा को रोकने के लिए अपनाए गए विभिन्न उपायों और समाधान को भी देखा जाएगा, जैसे कानूनी प्रावधान, सहायता केंद्र, आश्रय गृह, और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन। शोध का मुख्य उद्देश्य घरेलू हिंसा के प्रभावी समाधान के लिए नीति निर्माण में योगदान देना है और इसे रोकने के लिए समाज में जागरूकता फैलाना है। इसके अतिरिक्त, यह अध्ययन महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के लिए एक सशक्त दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगा, जिससे समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की समस्या को सुलझाया जा सके।

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