भारतीय संदर्भ में उच्च शिक्षा में सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षण
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Published on: Dec 31, 2025
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Co-Authors: रश्मि कुमारी राजौरा (शोधार्थी )
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DOI: CIJE20251041281_82
RASHMI RAJORA
रश्मि कुमारी राजौरा (शोधार्थी ), प्रो. रेनु यादव ( प्रोफेसर ) अध्यापक शिक्षा विभाग, हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़-123031
Co-Author 1
रश्मि कुमारी राजौरा (शोधार्थी )
रश्मि कुमारी राजौरा (शोधार्थी ), अध्यापक शिक्षा विभाग, हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़-123031
Co-Author 2
प्रो. रेनु यादव ( प्रोफेसर )
प्रो. रेनु यादव ( प्रोफेसर ) अध्यापक शिक्षा विभाग, हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़-123031
सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षण (सीआरटी ) एक ऐसा शैक्षिक दृष्टिकोण है जो सीखने की प्रक्रिया में शिक्षार्थियों की सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों को शामिल करने के महत्व पर बल देता है। यह लेख सीआरटी के सैद्धांतिक ढाँचे, उसके घटकों और भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में इसके प्रभावों का विश्लेषण करता है। विशेष रूप से, यह लेख सीआरटी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020, राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (एनसीएफ़) 2022, और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) की "नवाचारी शैक्षिक दृष्टिकोण और मूल्यांकन सुधारों के लिए दिशा-निर्देश" (2022) के साथ संरेखित करने पर केंद्रित है। इस लेख में भारतीय कक्षाओं में सीआरटी लागू करने के अवसरों और चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। इसके माध्यम से यह बताया गया है कि कैसे सीआरटी भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में समावेशिता, शैक्षणिक सफलता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा दे सकता है। अंत में भारतीय संदर्भ में उच्च शिक्षा में सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षा (सीआरटी ) लागू करने के महत्वपूर्ण कदमों को पिरामिड द्वारा दर्शाया गया है।