जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण में युवाओं का योगदान : विश्लेषणात्मक अध्ययन

Raghu Raj Singodia
Assistant Professor, Govt. Girls College, Jhunjhunu
21वीं सदी में जलवायु परिवर्तन मानव अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर पर्यावरणीय संकटों में से एक बन चुका है। औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न इस संकट ने न केवल पारिस्थितिक तंत्रों बल्कि सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं को भी प्रभावित किया है। भारत जैसे विकासशील देश में युवा वर्ग इस चुनौती का सामना करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और तकनीकी दक्षता उन्हें पर्यावरणीय सुधार के केंद्र में लाती है। इस अध्ययन में द्वितीयक आँकड़ों और केस स्टडी पद्धति के माध्यम से यह विश्लेषण किया गया है कि भारत के युवा किस प्रकार जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा, और नीति निर्माण जैसे क्षेत्रों में ठोस योगदान दे रहे हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, केरल, हिमाचल प्रदेश और असम के उदाहरण यह दर्शाते हैं कि युवाओं ने स्थानीय संसाधनों के उपयोग से सामुदायिक सहयोग के माध्यम से स्थायी परिवर्तन लाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। निष्कर्षतः, यदि युवाओं को तकनीकी संसाधन, वित्तीय सहयोग और नीति निर्माण में सहभागिता दी जाए, तो वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में एक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। मुख्य शब्द: जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, युवा सहभागिता, सतत विकास, नवाचार, जल संरक्षण, हरित प्रौद्योगिकी, सामुदायिक पहल

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