कौटिल्य का मंडल सिद्धांत: वर्तमान विदेश नीति में इसकी प्रासंगिकता

Rinku Meena
Research Scholar Political Science Department Mohanlal Sukhadiya University, Udaipur Email- rinkumeena010101@gmail.com, Mobile-7023255180
अर्थषास्त्र के सभी पहलुओं पर एक कालातीत व व्यापक ग्रंथ है। राजनीति, कानून, अर्थव्यवस्था, युद्ध व शांति का प्रबंधन, खुफिया, विदेष नीति व कूटनीति। यह राज्य के मूल उद्देष्यों की व्याख्या करता है अर्थात् अपने लोगों के कल्याण व सुरक्षा को सुनिष्चित करना। जटिल सुरक्षा विकास मैट्रिक्स वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की अभिन्न विषेषता है। सुरक्षा व विकास दोनों आवष्यक है। वे स्वाभाविक रूप से वैष्वीकृत समाज से जुड़े हुए है। जिसमें लोग परमाणु शस्त्रागार व सुरक्षा के लिए कई पारंपरिक व गैर-पारंपरिक खतरों की छाया में है। पूर्व छै। षिवषंकर मेनन ने देखा है कि कई मायनों में आज हम जिस दुनिया का सामना कर रहे है वह उस दुनिया के समान है जिसे कौटिल्य ने महानता के लिए मौर्य साम्राज्य का निर्माण करते समय संचालित किया था। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए अर्थषास्त्र की प्रासंगिकता के लिए इस विष्लेषण पर प्रकाष डाला जा सकता है कि ग्रंथ की सर्वाेत्कृष्टता सप्तांग के अपने तीन सिद्धांतों में परिलक्षित होती है जो राजकोष, प्रधानमंत्री, सेना सहित 7 अंगों के रूप में राज्य की शक्ति को देखता है, राजा मंडल (राज्यों का चक्र, जहां किसी का अपना देष मित्रवत व अमित्र पड़ोसियों से घिरा हुआ है) व षडगुण 6 तरीके से एक राज्य विदेष नीति का संचालन कर सकता है। कौटिल्य ने पड़ोसी, मध्यवर्ती व दूर के राज्यों की विभिन्न श्रेणियों के साथ राज्य की निरंतर बातचीत के बारे में जो लिखा व अभ्यास किया वह अत्यधिक प्रासंगिक है। उनकी षिक्षाएं भारत के बौद्धिक डीएनए का हिस्सा है। परियोजना में भाग लेने वाले रणनीतिक मामलांे के विद्वान माइकल लिबिंग कहते है कि कौटिल्य भारत की रणनीतिक संस्कृति को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है।

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