श्रीमाधोपुर नगर की वर्तमान नगरीय आकारिकीः भूमि उपयोग, आवासीय प्रतिरूप एवं वाणिज्यिक विस्तार का भौगोलिक विश्लेषण

Vishanu Dutt Meena
सहायक आचार्य (भूगोल), राजकीय कन्या महाविद्यालय श्रीमाधोपुर (सीकर)

Co-Author 1

डॉ. मनोज कुमार
आचार्य, भूगोल विभाग, सेठ नेतराम मघराज टीबड़ेवाल राजकीय महिला महाविद्यालय, झुंझुनू (राजस्थान)
नगरीय आकारिकी किसी नगर के भौतिक स्वरूप, भूमि उपयोग, आवासीय संरचना, आर्थिक गतिविधियों, सार्वजनिक सुविधाओं तथा परिवहन संपर्क के स्थानिक संगठन को समझने का महत्वपूर्ण आधार है। वर्तमान नगरीय आकारिकी केवल निर्मित क्षेत्र के विस्तार का परिणाम नहीं होती, बल्कि यह ऐतिहासिक विकास, जनसंख्या वृद्धि, भूमि उपयोग परिवर्तन, आवासीय विस्तार, व्यापारिक गतिविधियों तथा क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था के संयुक्त प्रभाव से निर्मित होती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में राजस्थान के सीकर जिले में स्थित श्रीमाधोपुर नगर की वर्तमान नगरीय आकारिकी का भौगोलिक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में भूमि उपयोग प्रतिरूप, वार्ड संरचना, जनसंख्या वितरण, आवासीय प्रतिरूप, पारंपरिक एवं उभरते वाणिज्यिक क्षेत्रों, औद्योगिक गतिविधियों, सार्वजनिक सुविधाओं तथा परिवहन संपर्क को आधार बनाया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि श्रीमाधोपुर नगर का वर्तमान स्वरूप एकरूप नहीं है। नगर के केंद्रीय भाग में पुरानी बसावट, सघन आवासीय क्षेत्र, चौपड़-केंद्रित पारंपरिक बाजार तथा मिश्रित भूमि उपयोग प्रमुख हैं, जबकि बाहरी भागों में नवीन आवासीय कॉलोनियाँ, कृषि भूमि, रिक्त भूखंड, ढाणी-आधारित बसावट तथा ग्रामीण-नगरीय संक्रमण क्षेत्र पाए जाते हैं। इस प्रकार नगर में केंद्रीय सघनता और परिधीय विस्तार का सह-अस्तित्व दिखाई देता है। वाणिज्यिक संरचना में चौपड़ पारंपरिक केंद्रीय व्यापारिक नाभिक के रूप में कार्य करता है। इसके साथ स्टेशन रोड, खंडेला रोड, बाईपास, राज्य राजमार्ग तथा कृषि उपज मंडी के आसपास नए सड़क-आधारित एवं सेवा-आधारित वाणिज्यिक क्षेत्र विकसित हो रहे हैं। इससे नगर में रेखीय तथा उभरते हुए बहु-केंद्रीय वाणिज्यिक विकास की प्रवृत्ति दिखाई देती है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि श्रीमाधोपुर वर्तमान में पारंपरिक कस्बाई संरचना से विकसित होते हुए एक संक्रमणशील नगरीय केंद्र का स्वरूप ग्रहण कर रहा है। अतः भविष्य के विकास के लिए भूमि उपयोग नियोजन, परिधीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का पूर्व-विकास, यातायात प्रबंधन, हरित क्षेत्रों का संरक्षण तथा केंद्रीय बाजार के सुव्यवस्थित पुनर्गठन की आवश्यकता है। प्रमुख शब्दः नगरीय आकारिकी, भूमि उपयोग, आवासीय प्रतिरूप, वाणिज्यिक विस्तार, ग्रामीण-नगरीय संक्रमण, श्रीमाधोपुर।

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