ई-क्रांति एवं डिजिटल प्लेटफाॅर्म

Ashok Kumar Meena
सह आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग सेठ आर.एल. सहरिया राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कालाडेरा, जयपुर
परम्परागत रूप से शासन का तात्पर्य ‘‘राजनीतिक व्यवस्था तथा उस शक्ति से है जो देश के आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक विकास के लिए उत्तरदायी है। यह सरकार की नीति-निर्माण, नीति संशोधन और नीति क्रियान्वयन की शक्ति है। शासन का सुन्दर, स्वच्छ अथवा आदर्श स्वरूप ही ‘सुशासन‘ है।‘‘ प्रस्तुत शोध पत्र भारत में ई-क्रांति के स्वरूप, उसकी आवश्यकता, विभिन्न डिजिटल प्लेटफाॅर्म, उनकी पारदर्शिता तथा उनकी विश्वसनीयता के विषय में एक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

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