प्रमुख सब्जियों के उत्पादन का बदलता परिदृश्यः राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर आकलन का अध्ययन
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Published on: Mar 31, 2026
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Co-Authors: परांजल कनौजिया
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DOI: CIJE20261111362_63
AMALENDU KUMAR
सहायक प्राध्यापक, कृषि अर्थशास्त्र विभाग, ति0 कृ0 महा0, ढ़ोली, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार, भारत
Co-Author 1
परांजल कनौजिया
एमएससी, पुष्प कृषि और भूदृश्य निर्माण, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना, पंजाब, भारत
बिहार देश में सभी मौसमों में उगाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की सब्जियों का एक अग्रणी उत्पादक राज्य है। पिछले दशकों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सब्जियों के क्षेत्रफल और उत्पादन में उल्लेखनीय दर से वृद्धि देखी गई है। हालांकि, क्षेत्रफल और उत्पादन में इस वृद्धि के बावजूद प्रति व्यक्ति सब्जी की अनुशंसित खपत की आवश्यकताओं को यह स्तर पूरा नहीं कर पाता है। पिछले दशकों में आय में वृद्धि के कारण लोगों की पसंद, स्वाद, आय और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से सब्जियों के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है लोग अपने आहार में सब्जियों का अधिक व्यवहार करने लगें हैं। बड़ा सवाल आज यह है कि किस सब्जी फसल की मांग अधिक है और किसकी कम इसके आकलन का कोई लेखा जोखा उपलब्ध नही है। इसलिए, इस शोधपत्र को तैयार किया गया है जिसके पीछे मुख्य उद्देश्य सकल फसल क्षेत्रफल में उन सब्जियों का अध्ययन करना है जिनका खेती क्षेत्र विगत वर्षाे में घटा है अथवा बढ़ा है इसका वास्तविक स्थिति को प्रस्तुत करना मुख्य उद्देश्य है। इस अध्ययन को द्वितीय स्तर के आंकड़ों जैसे सरकारी रिपोर्ट एवं अन्य प्रकाशित आंकड़ों को उपयोग में लाया गया है। एकत्रित आंकड़ों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर वर्ष 2004 से 2024 तक सभी सब्जियों के उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन यह वृद्धि विभिन्न सब्जियों में अलग-अलग पाई गई है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर के विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ सब्जियों के रकबे में गिरावट आई है, जो कि संभवतः उनके क्षेत्रफल में कमी के कारण है, जबकि उत्पादन में वृद्धि उनके क्षेत्रफल और उत्पादकता में वृद्धि या दोनों के कारण हुई है। सब्जी फसलों के मुख्य मौसम में जब अत्यधिक उत्पादन होता है और विपणन योग्य अधिशेष बहुत अधिक होता है, तब सब्जियों की कीमतें बहुत तेजी से गिर जाती हैं, कभी-कभी उत्पादन लागत कम होने पर भी ऐसा देखा जाता हैै। इस स्थिति में किसान अगले मौसम में सब्जी की फसल बदलने और अन्य फसलों की खेती करने के लिए विवश हो जाते हैं। बाजार में सब्जियों की भारी मात्रा में आपूर्ति के कारण उपज की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव होते रहता है, इस कारण से सब्जियों की कीमतें बहुत अस्थिर हो जाती हैं। बिहार राज्य, उत्तरी बिहार एवं दक्षिणी बिहार दो हिस्सों में बँटा हुआ है जिसमें उत्तरी बिहार, जो सब्जियों के उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। इस क्षेत्र में भी पिछले कुछ वर्षों में सब्जियों के रकवा और उत्पादन में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। अध्ययन में देश और राज्य में सब्जियों के रकबे को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें मुख्य उपाय जैसे पूर्व और पश्चात उत्पादन प्रबंधन, कटाई प्रक्रियाएं, ग्रेडिंग और विपणन प्रबंधन हैं, जो अभी भी इन क्षेत्रों में बहुत कम प्रचलित हैं और इनमें सुधार की आवश्यकता है। केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर के कृषि और बागवानी अधिकारियों से इस दिशा में पहल की आवश्यकता है जिससे आय अर्जित करने, रोजगार सृजित करने और जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके। प्रमुख शब्द: परिदृश्य, परिवर्तन, प्रमुख, सब्जियाँ, बिहार