विकसित भारत @2047 के लिए समग्र शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों एवं संवैधानिक आदर्शों का समन्वय
DR. NAVIN KUMAR MOKTA
1. डॉ. नवीन कुमार मोक्टा, सहायक आचार्य, शैक्षिक मनोविज्ञान एवं शिक्षा आधार विभाग, एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली-110016 E-mail: navinmokta.ncert@gmail.com
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2. डॉ. प्रभात कुमार मिश्र, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, शैक्षिक मनोविज्ञान एवं शिक्षा आधार विभाग, एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली-110016 E-mail: prabhatkm@rediffmail.com
विकसित भारत @2047 की परिकल्पना भारत को केवल आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जो मानवीय मूल्यों, संवैधानिक आदर्शों और लोकतांत्रिक चेतना पर आधारित हो। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से समग्र शिक्षा वह माध्यम है, जो विद्यार्थियों के बौद्धिक, नैतिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को एक साथ आगे बढ़ाती है। यह शोध-पत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के संदर्भ में समग्र शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों एवं संवैधानिक आदर्शों के समन्वय का अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन में कक्षा तथा संस्थागत स्तर पर प्राप्त शैक्षिक अनुभवों के आधार पर दर्शन, समाजशास्त्र और शिक्षा के सैद्धांतिक दृष्टिकोणों के साथ-साथ कक्षा-स्तरीय तथा विद्यालय/महाविद्यालय-स्तर के व्यावहारिक उदाहरणों को शामिल किया गया है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना और मौलिक कर्तव्यों को शिक्षा से जोड़ते हुए यह शोध स्पष्ट करता है कि मूल्य-आधारित एवं संविधानोन्मुख शिक्षा विद्यार्थियों को केवल कुशल मानव संसाधन ही नहीं बनाती, बल्कि उन्हें संवेदनशील, उत्तरदायी और जागरूक नागरिक के रूप में भी विकसित करती है। इस शोध-पत्र से यह निष्कर्ष निकलता है कि यदि शिक्षा प्रणाली में समग्रता, मानवीय दृष्टिकोण और संवैधानिक चेतना को प्रभावी रूप से शामिल किया जाए, तो विकसित भारत @2047 की संकल्पना को एक मजबूत नैतिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक आधार प्राप्त हो सकता है। यह अध्ययन लेखक के शिक्षण एवं अकादमिक अनुभवों से प्रेरित वैचारिक-विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण पर आधारित है।