भारतीय ज्ञान परम्परा में वेद वेदांग का अध्ययन

Prof. Nand Kishor
प्रो.नन्द किशोर, शिक्षक शिक्षा विभाग, हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़, nandkishor@cuh.ac.in
भारतीय ज्ञान परम्परा का मूल आधार वेद माने जाते हैं, जिन्हें अपौरुषेय तथा सनातन ज्ञान का स्रोत कहा गया है। वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, अपितु उनमें दर्शन, विज्ञान, समाजशास्त्र, शिक्षा, नैतिकता तथा जीवन-मूल्यों का समन्वित ज्ञान निहित है। वेदों की शुद्ध समझ एवं संरक्षण हेतु वेदाङ्गों की परम्परा विकसित हुई। वेदाङ्ग वेदों के सहायक शास्त्र हैं, जो वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, अर्थ, प्रयोग तथा काल निर्धारण में सहायक हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में भारतीय ज्ञान परम्परा के सन्दर्भ में वेदों एवं वेदाङ्गों की अवधारणा, संरचना, उद्देश्य तथा समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।

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