पर्यावरण की आर्थिक धारणाओं के प्रति उत्पादकों की जागरूकता : वर्तमान की महती आवश्यकता
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Published on: Dec 31, 2025
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Co-Authors: डॉ. स्वाति बत्रा
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DOI: CIJE20251041286_87
Phool Chand Maholia
शोधार्थी, अर्थशास्त्र विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर Email-pcmaholia@gmail.com, Mobile-9413644681
Co-Author 1
डॉ. स्वाति बत्रा
शोध निर्देशक अर्थशास्त्र विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर
वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वैश्विक विमर्श के केन्द्रीय मुद्दे बन चुके हैं। उत्पादन तंत्र पर बढते औद्योगिकरण, कृषि विस्तार, खनन, ऊर्जा उपभोग और कार्बन उत्सर्जन ने प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाला है। प्रस्तुत पत्र में विषय वस्तु विष्लेषण एवं सन्दर्भ अवलोकन विधि से यह जानने का प्रयास किया गया है कि मानव की आर्थिक क्रियाएँ विशेषकर उत्पादकीय क्रियाओं के चलते विकास के नाम पर जो पर्यावरणीय बिगाड व संकटों को जन्म मिल रहा है, इस लिहाज से पर्यावरण केन्द्रित आर्थिक धारणाओं के प्रति उत्पादकों की जागरूकता वर्तमान की एक महती आवश्यकता है। ऐसे में ’’पर्यावरण की आर्थिक धारणाएँ’’ यह प्रतिपादित करती हैं कि पर्यावरण केवल सामाजिक-नैतिक जिम्मेदारी नही है, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण पूँजी है। उत्पादकों के लिए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब यह आवष्यक हो गया है कि वे संसाधनों के संरक्षण, प्रदूषण नियन्त्रण, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग तथा हरित प्रौद्योगिकी अपनाने में सजग भूमिका निभाएँ। इस लिहाज से प्रस्तुत पत्र इस आवश्यकता को रेखांकित करता है कि उत्पादकों की पर्यावरणीय आर्थिक चेतना एक जरूरी उपागम है तथा इस मुद्दे पर उनकी जागरूकता पर्यावरण सरंक्षण का आवश्यक दृष्टिकोण है।